वीसा पावर की 730 एकड़ जमीन खरीद ली गुजरात की कंपनी ने…

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रायगढ़। दिवालिया हो चुकी वीसा पावर कंपनी का लिक्विडेशन पूरा हो चुका है। डूमरपाली और देवरी में 1200 मेगावाट पावर प्लांट प्रोजेक्ट बंद हो गया था। इसकी संपत्तियों की नीलामी की जा रही थी, जो पूरी हो चुकी है। 730 एकड़ जमीन को गुजरात की एक कंपनी टोरेंट पावर द्वारा खरीदे जाने की जानकारी मिल रही है। अभी दोनों पक्षों ने इसे सार्वजनिक नहीं किया है। रायगढ़ जिले के देवरी और डूमरपाली में वीसा पावर कंपनी 1200 मेगावाट का पावर प्लांट लगाना चाहती थी। काम शुरू भी हुआ लेकिन कंपनी दिवालिया हो गई। एनसीएलटी में कोई समझौता नहीं हुआ तो क्रेडिटर्स का कर्ज उतारने के लिए करीब 730 एकड़ जमीन समेत अन्य संपत्तियां नीलाम की गई हैं।

वीसा पावर लिमिटेड ने वर्ष 2005 में छग शासन से एमओयू किया। कंपनी 1200 मेगावाट का प्लांट लगाना चाहती थी। बैंकों से मनमाने तरीके से लोन लेकर प्लांट स्थापना का काम प्रारंभ हुआ। भेल, एल एंड टी जैसी कंपनियों को टेंडर दिया गया। लेकिन कंपनी अपने कर्ज को चुकाने में नाकाम रही। प्लांट निर्माण का काम 2014 में बंद हो गया। इसके बाद से कंपनी उबर नहीं पाई। केंद्र सरकार ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड को दोबारा संशोधन के साथ समय सीमा में बांधा तो कर्ज लेकर नहीं चुकाने वाली कंपनियां दिवालिया घोषित होने लगी। वीसा पावर को भी बैंकों की अपील पर दिवालिया घोषित किया गया। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की कोलकाता बेंच में रिजॉल्यूशन केस दायर किया गया।

लेकिन बैंकों और कंपनी के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद एनसीएलटी ने वीसा पावर को लिक्विडेशन का आदेश दिया। इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुप्रीम कोर्ट ने केवल मशीनरी आदि सामानों को छोडक़र जमीन की नीलामी करने का आदेश दिया है। इसके बाद वीसा पावर ने देवरी और डूमरपाली के 587.51 एकड़ निजी भूमि और 99.02 एकड़ उद्योग विभाग से लीज पर प्राप्त भूमि की नीलामी की घोषणा की गई। इसका रिजर्व प्राइस 170 करोड़ रुपए रखा गया था। इसके अलावा डोंगीतराई, किरीतमाल, पंडरीपानी, कोड़तराई, चारभाटा, लेबड़ा, डोंगाढकेल, काशीचुआं और साराडीह के 39.85 एकड़ कंपनी द्वारा स्वयं क्रय की गई भूमि भी नीलामी में शामिल थी जिसके लिए 1.95 करोड़ रिजर्व प्राइस थी। इन संपत्तियों के अलावा कंपनी की कीमत 71.60 करोड़ तय की गई। बताया जा रहा है कि सभी संपत्तियों के लिए करीब 400 करोड़ की बोली लगाई गई।

4000 करोड़ का कर्ज
वीसा पावर पर फाइनेंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को मिलाकर करीब 4000 करोड़ का कर्ज था। इसमें से एनसीएलटी में करीब 3000 करोड़ का क्लेम ही मान्य किया गया। सीबीआई ने अगस्त 2023 में वीसा पावर के चेयरमैन विशंभर शरण, एमडी विकास अग्रवाल और ज्वाइंट एमडी सुब्रतो द्विवेदी के विरुद्ध 1964 करोड़ की धोखाधड़ी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज किया है। पब्लिक सेक्टर के बैंकों से इतनी बड़ी रकम लोन लेकर इसे डायवर्ट किया गया। दूसरी कंपनियों के शेयर और इक्विटी खरीदने में इसका इस्तेमाल किया गया। इधर वीसा पावर दिवालिया हो गया।

मशीनरी बची ही नहीं
वीसा पावर के दिवालिया होने के बाद भेल और 11 बैंकों का करोड़ों रुपया फंस गया। मशीनरी आदि तो भेल ने लगाई थी जिसका भुगतान नहीं हुआ। भेल को 2665 करोड़ का ऑर्डर मिला था। मौका पाकर कबाडिय़ों ने वीसा पावर की सारी मशीनों को काट डाला। धीरे-धीरे करके करोड़ों का कबाड़ पार हो गया। यह रायगढ़ के ही कई स्टील प्लांटों में अच्छी कीमत पर बेचा गया। पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

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