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कोटवारी जमीन के मामले में अब नपेंगे कई बिल्डर और व्यापारी…

  • 20 प्रकरणों में कोटवारी जमीनों का मांगा प्रतिवेदन, राजस्व मंडल के आदेश पर होगा अमल

रायगढ़ /राजस्व मंडल के आदेश आखिरकार फाइलों से बाहर आ ही गए। रायगढ़ के बाबूओं ने भूमाफियाओं को बचाने के लिए इन आदेशों को दबा दिया था। बहुत कठोर शब्दों में राजस्व मंडल अध्यक्ष डीएस मिश्र ने आदेश दिए थे। 20 प्रकरणों के आदेश निकाले जा चुके हैं। अब पटवारियों को कहा गया है कि वे भूमि की वर्तमान स्थिति पर प्रतिवेदन दें। इसके बाद कार्रवाई होगी।कोटवारी जमीनों की अवैध खरीदी-बिक्री का मामला लंबे समय से अटका हुआ है। राज्य सरकार ने सभी कोटवारी जमीनों को सेवा भूमि अहस्तांतरणीय दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन उसके पहले ही कई जगहों की कोटवारी भूमि बिक चुकी थी।

रायगढ़ के कारोबारियों ने सांठगांठ करके करीब 34 गांवों में मौजूद कोटवारी जमीनों की बिक्री की अनुमति जारी करवा ली थी। एक ही दिन में राजस्व मंडल ने करीब 34 प्रकरणों में आदेश हो पारित किए थे। इन प्रकरणों को बाद में तत्कालीन अध्यक्ष डीएस मिश्र ने पुनर्विलोकन में लेकर निरस्त किया था। इन प्रकरणों की फाइल जब रायगढ़ पहुंची तो यहां के बाबूओं ने भू-माफियाओं के इशारे पर फाइलें गुमा दीं। कोटवारी भूमि की बिक्री नहीं हो सकती। कलेक्टर भी इसका आदेश नहीं दे सकते क्योंकि यह भूमि कोटवार पद को कृषि कार्य के लिए दिया जाता है। जो भी कोटवार बनता था, वह उस भूमि पर खेती करके जीवन-यापन करता था। रायगढ़ के कारोबारियों ने सांठगांठ करके करीब 34 गांवों में मौजूद कोटवारी जमीनों की बिक्री की अनुमति जारी करवा ली थी। एक ही दिन में राजस्व मंडल ने करीब 34 प्रकरणों में आदेश हो पारित किए थे। इन प्रकरणों को बाद में तत्कालीन अध्यक्ष डीएस मिश्र ने पुनर्विलोकन में लेकर निरस्त किया था। इन प्रकरणों की फाइल जब रायगढ़ पहुंची तो यहां के बाबूओं ने भू-माफियाओं के इशारे पर फाइलें गुमा दीं। कोटवारी भूमि की बिक्री नहीं हो सकती। कलेक्टर भी इसका आदेश नहीं दे सकते क्योंकि यह भूमि कोटवार पद को कृषि कार्य के लिए दिया जाता है। जो भी कोटवार बनता था, वह उस भूमि पर खेती करके जीवन-यापन करता था।

शहर के कई भू-माफियाओं ने कलेक्टर से कोटवारी जमीन खरीदने की अनुमति मांगी। यहां से आवेदन रिजेक्ट होने के बाद राजस्व मंडल में सेटिंग करके अपील की गई। तत्कालीन अध्यक्ष ने सबको अनुमति दे दी, जिसके बाद धड़ाधड़ रजिस्ट्रियां हुईं। इसके बाद सीनियर ब्यूरोक्रेट डीएस मिश्र अध्यक्ष बने तो उन्होंने रायगढ़ जिले के 34 प्रकरणों को मंगवाया। उनको पुनर्विलोकन में लेकर सारे आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही कहा कि अवैधानिक रूप से खरीदी-बिक्री करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही की जाए। अब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 20 प्रकरणों में राजस्व मंडल का आदेश मंगवाया।

शहर के कई भू-माफियाओं ने कलेक्टर से कोटवारी जमीन खरीदने की अनुमति मांगी। यहां से आवेदन रिजेक्ट होने के बाद राजस्व मंडल में सेटिंग करके अपील की गई। तत्कालीन अध्यक्ष ने सबको अनुमति दे दी, जिसके बाद धड़ाधड़ रजिस्ट्रियां हुईं। इसके बाद सीनियर ब्यूरोक्रेट डीएस मिश्र अध्यक्ष बने तो उन्होंने रायगढ़ जिले के 34 प्रकरणों को मंगवाया। उनको पुनर्विलोकन में लेकर सारे आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही कहा कि अवैधानिक रूप से खरीदी-बिक्री करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही की जाए। अब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 20 प्रकरणों में राजस्व मंडल का आदेश मंगवाया।

कोरबा के करतला रेंज में नन्हे हाथी के जन्म पर ग्रामीणों ने मनाई छठी, नाम रखा ‘काशी’…

कोरबा। करतला वन परिक्षेत्र के काशीपानी जंगल में 9 हाथियों के झुंड में नन्हे शावक के जन्म पर आसपास के 7 गांवों के ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उसकी छठी मनाई। ग्रामीणों ने नवजात हाथी का नामकरण करते हुए उसका नाम ‘काशी’ रखा है।

यह अनूठा आयोजन कारीपानी मंदिर के नीचे स्थित गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें काशीपानी सहित रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और विधिवत पूजा-अर्चना की, जिसके बाद भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।

वन विभाग की समझाइश: हाथियों से दूरी बनाए रखें ग्रामीण

इस अवसर पर वन विभाग के एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हाथियों से छेड़छाड़ न करें और उनसे सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। उन्होंने बताया कि नवजात शावक समेत 9 हाथियों का यह दल फिलहाल काशीपानी के जंगल में ही विचरण कर रहा है। इसके अलावा कुदमुरा क्षेत्र में 32 और चचिया इलाके में 7 हाथी मौजूद हैं। क्षेत्र में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान भी पहुंचाया है।

जिले में हाथियों की आमद और छठी मनाने की परंपरा

कोरबा जिले में हाथियों का पहला दल वर्ष 2000 में कुदमुरा के आमटिकरा क्षेत्र में पहुंचा था। वर्तमान समय में जिले में हाथियों की संख्या कई बार 150 तक पहुंच जाती है। हाथियों के नवजात बच्चों की छठी मनाने और उनके नामकरण की यह परंपरा पहले धिनारा गांव से शुरू हुई थी, जिसे अब क्षेत्र के अन्य ग्रामीण भी अपना रहे हैं।

खटियापाटी के तालाब में मिला लापता नाबालिग का शव, सिर पर मिले चोट के निशान…

बलौदाबाजार / जिले के खटियापाटी गांव स्थित एक तालाब में सोमवार सुबह 16 वर्षीय नाबालिग का शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान सुजल गेंडरे (पिता संतराम गेंडरे) के रूप में हुई है। सुजल एक दिन पहले से लापता था और घर नहीं लौटा था, जिसके बाद परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट कोतवाली थाने में दर्ज कराई थी।

सोमवार सुबह ग्रामीणों ने सुजल का शव गांव के तालाब में झाड़ियों के बीच फंसा देखा। इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। शव मिलने की खबर फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाकर जांच शुरू की।

सिर पर चोट के निशान, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

प्रारंभिक जांच में मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं। सिर पर चोट दिखने के बाद उसकी मौत को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, चोट कैसे लगी और मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस हत्या की आशंका समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही है।

घटनास्थल की सघन जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं, ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साफ होगी स्थिति

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खोमन सिन्हा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार सुबह खटियापाटी के तालाब में सुजल गेंडरे का शव बरामद हुआ है। नाबालिग की गुमशुदगी की शिकायत पहले ही कोतवाली थाने में दर्ज थी। पुलिस टीम घटनास्थल की बारीकी से जांच कर रही है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अनुसार, मौत की वास्तविक वजह को लेकर फिलहाल कुछ भी स्पष्ट कहना जल्दबाजी होगी। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत के सही कारणों और परिस्थितियों का पता चल सकेगा।

जंगली सुअर का शिकार कर मांस बेचने की तैयारी, 3 गिरफ्तार…

रायगढ़ । जंगली सुअर का शिकार कर उसका मांस बेचने की तैयारी कर रहे तीन ग्रामीणों को वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने अपने हत्थे चढ़ाया है। आरोपियों के पास से 30 किलोग्राम जंगली सूअर का मांस और शिकार में इस्तेमाल होने वाले औजार मिले, जिन्हें जब्त करते हुए उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, वन विभाग के रायगढ़ रेंज में वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके मांस की बिक्री को लेकर लगातार जानकारी विभाग को मिल रही थी।

इन सूचनाओं के आधार पर वन विभाग ने मुखबिर तंत्र सक्रिय कर ग्रामीणों की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी थी।  इसी दौरान ग्राम तिलगा में जंगली सूअर का शिकार कर उसके मांस की बिक्री किए जाने की मुखबिर से जानकारी मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने दबिश देते हुए ग्राम तिलगा निवासी बालाराम राठिया और दीनबंधु राठिया व ग्राम बेहरपाली के कार्तिक विश्वकर्मा को हिरासत में लेते हुए उनसे पूछताछ की।

तलाशी के दौरान टीम को उनके पास से तकरीबन 30 किलोग्राम जंगली सूअर का मांस और शिकार में इस्तेमाल होने वाले औजार मिले। इसके साथ ही वजन करने का तराजू, एक चाकू और दो धारदार कुल्हाड़ियां जब्त की गई हैं। वहीं तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

ट्रांसपोर्ट नगर के पास अज्ञात शख्स की हत्या, पुलिस ने 3 लोगों को लिया कस्टडी में…

रायगढ़ । शनिवार की सुबह ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैंड के समीप नेशनल हाईवे पर सड़क किनारे संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की लाश मिलने से आसपास क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। मामले की सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू की। मृतक के शरीर पर चोट के निशान होने की वजह से प्रथम दृष्टया हत्या का मामला प्रतीत होने पर फॉरेंसिक मोबाइल यूनिट की भी मदद ली गई। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाते हुए जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं मृतक की शिनाख्त भी नहीं हो पाई है।

परिजनों की पतासाजी के लिए पुलिस ने फोटो आसपास के जिलों के थानों में भिजवाया है तथा सोशल मीडिया पर भी प्रसारित करवाया गया है। वहीं पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अज्ञात बदमाशों द्वारा लूटपाट के इरादे से उसके साथ मारपीट की गई है और सीने एवं पीठ में किसी धारदार वस्तु से वार किया गया है, जिसके कारण उसकी मौत हो गई है। वहीं, जूटमिल पुलिस ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए तीन संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

शनिवार की सुबह जूटमिल क्षेत्र में स्थित ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैंड के पास नेशनल हाईवे में सड़क किनारे एक युवक की लाश देख आसपास लोगों की भीड़ लग गई थी। वहीं मामले की सूचना जूटमिल थाने में दिए जाने पर थाना प्रभारी अभिनव कांत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल शुरू की। मृतक के सीने और पीठ के अलावा कंधे में चोट के निशान मिलने पर प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत होने से टीआई अभिनव कांत ने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक मोबाइल यूनिट की भी मदद ली गई। एफएसएल टीम के साथ ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह बघेल ने भी मौका मुआयना कर मामले की जानकारी ली।

वहीं मृतक की शिनाख्त नहीं होने पर आसपास के लोगों से पूछताछ की गई, परंतु किसी प्रकार की जानकारी नहीं मिल सकी। लाश से कुछ दूरी पर मृतक का बैग मिला, जिसमें चादर एवं अन्य कपड़े थे, जिससे माना जा रहा है कि वह ग्रामीण क्षेत्र का रहने वाला है तथा मुसाफिरी में रायगढ़ आया था। चूंकि मृतक बाहर का रहने वाला है, जिससे स्थानीय स्तर पर उसकी किसी से कोई पुरानी रंजिश का सवाल ही नहीं उठता। लिहाजा माना जा रहा है कि रात को बस स्टैंड तरफ उसके आने पर बदमाशों द्वारा लूटपाट के इरादे से उसके साथ मारपीट की गई होगी और इसी बीच पेचकस नुमा धारदार हथियार से सीने में वार करने के कारण उसकी मौत हुई होगी।

वहीं पंचनामा कार्रवाई के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाते हुए सभी बिंदुओं पर मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि जूटमिल पुलिस ने अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने तीन संदेहियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं मृतक की शिनाख्त के लिए पुलिस ने फोटो आसपास के जिलों के थानों में भिजवाया है तथा सोशल मीडिया पर भी प्रसारित करवाया गया है।

चौक पर लगे सीसीटीवी खराब पड़े

ट्रांसपोर्ट नगर के पास चौराहे में डिवाइडर पर पूर्व में प्रशासन द्वारा सीसीटीवी लगवाया गया था, परंतु लंबे समय से सीसीटीवी खराब पड़े हैं और कैमरे धूल फांक रहे हैं। जिस खंभे पर सीसीटीवी के कैमरे लगे हैं, उसके सामने ही लाश मिली है। यदि कैमरे सही होते तो वास्तविक घटना का खुलासा हो सकता था। वहीं पुलिस अब घटनास्थल से कुछ दूर पर दुकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी है।

15 नवंबर से धान खरीदी शुरू : किसान भाई जान लें जरूरी नियम, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा से लेकर नमी के मानक तक…

  • एक एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल की सीमा, 21 क्विंटल बिकने पर 65,100 रुपए; 31 जनवरी 2027 तक चलेगी खरीदी

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के धान उत्पादक किसानों के लिए सरकारी खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो गई है। प्रदेश में वर्ष 2026-27 की धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होगी और 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। सरकार ने इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। किसानों को उनकी उपज का भुगतान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किया जाएगा, जबकि एक एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान ही खरीदा जाएगा। खरीदी की तारीख का ऐलान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्ग में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में किया। उन्होंने बताया कि 15 नवंबर से प्रदेश के खरीदी केंद्रों पर धान लिया जाने लगेगा। इस दौरान पंजीकृत किसान तय केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकेंगे। सरकार का मकसद किसानों से तय समय के भीतर धान की खरीदी पूरी करना है।

एक एकड़ में कितनी बिक्री, कितना भुगतान

सरकार ने इस बार प्रति एकड़ खरीदी की सीमा तय कर दी है। एक पंजीकृत किसान एक एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान बेच सकेगा, यानी बिक्री पंजीकृत जमीन के रकबे के हिसाब से ही होगी। धान की दर 3100 रुपए प्रति क्विंटल तय है। इस हिसाब से 21 क्विंटल धान बेचने पर किसान को 65,100 रुपए बनेंगे।

बिना जरूरी पंजीयन के बिक्री में आ सकती है दिक्कत

इस बार धान बेचने के लिए एग्रीस्टैक पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है। किसानों को पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी, जिसमें किसान और खेती की जमीन से जुड़े ब्योरे शामिल होंगे। इससे सरकार को किसानों का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। जरूरी पंजीयन के बिना किसानों को धान बेचने में परेशानी हो सकती है। इसलिए उन्हें समय रहते पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।

तय तारीख पर पहुंचना जरूरी, अंगूठे से होगी पहचान की पुष्टि

खरीदी केंद्रों पर इस बार टोकन व्यवस्था लागू रहेगी। किसानों को तय तारीख पर ही अपनी उपज लेकर केंद्र पहुंचना होगा। खरीदी के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा, जिससे किसान की पहचान की पुष्टि होगी। इस इंतजाम का मकसद गलत पहचान के आधार पर धान की बिक्री को रोकना है।

नमी 17 प्रतिशत से ऊपर गई तो खरीदी से इनकार संभव

उपज की गुणवत्ता के लिए सरकार ने नमी का मानक तय किया है। केंद्रों पर अधिकतम 17 प्रतिशत नमी वाला धान ही स्वीकार किया जाएगा, इससे ज्यादा नमी होने पर खरीदने से इनकार किया जा सकता है। धान में मिट्टी और दूसरी अशुद्धियां भी नहीं होनी चाहिए। किसान उपज को अच्छी तरह सुखाकर ही केंद्र पर लाएं, इससे बेचते समय परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।

पिछले सीजन से 20 लाख टन ज्यादा, पांच साल में 63 प्रतिशत बढ़ा लक्ष्य

पिछले सीजन में प्रदेश से 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इस बार का लक्ष्य 160 लाख मीट्रिक टन रखा गया है, यानी पिछले साल की तुलना में 20 लाख मीट्रिक टन ज्यादा। पांच साल पहले की तस्वीर देखें तो वर्ष 2021-22 में खरीदी का लक्ष्य 98 लाख मीट्रिक टन था। अब 2026-27 के लिए यह 160 लाख मीट्रिक टन है। इन पांच सालों में लक्ष्य 62 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है, जो प्रतिशत के हिसाब से करीब 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। ये आंकड़े खरीदी के निर्धारित लक्ष्य से जुड़े हैं।

बढ़े लक्ष्य के साथ केंद्रों पर इंतजाम की जरूरत

लक्ष्य बढ़ने के साथ सरकार को खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी। धान रखने और उसके परिवहन के इंतजाम भी जरूरी होंगे। किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो, इसके लिए केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी।

धान लेकर निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • समय रहते एग्रीस्टैक पर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर लें।
  • तय तारीख पर ही उपज लेकर खरीदी केंद्र पहुंचें।
  • बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए तैयार रहें।
  • धान को अच्छी तरह सुखाएं, ताकि नमी 17 प्रतिशत से ज्यादा न रहे।
  • मिट्टी और दूसरी अशुद्धियां हटाकर उपज लाएं।
  • प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा याद रखें।

एक नजर में: धान खरीदी 2026-27

  • खरीदी की अवधि: 15 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027
  • खरीदी का लक्ष्य: 160 लाख मीट्रिक टन
  • पिछले सीजन की खरीदी: 140 लाख मीट्रिक टन
  • दर: 3100 रुपए प्रति क्विंटल
  • प्रति एकड़ अधिकतम सीमा: 21 क्विंटल (65,100 रुपए)
  • पंजीयन: एग्रीस्टैक पर अनिवार्य
  • सत्यापन: टोकन व्यवस्था और बायोमेट्रिक पहचान
  • नमी की सीमा: अधिकतम 17 प्रतिशत
  • 2021-22 का लक्ष्य: 98 लाख मीट्रिक टन

बाप ने नदी में डुबोया, फिर शव के पैर छूकर मांगी माफी…

बिना ब्याही प्रेग्नेंट हुई बेटी, बाप ने नदी में डुबोया, फिर शव के पैर छूकर मांगी माफी..

आगरा/ रिश्तों और संवेदनाओं को तार-तार कर देने वाला ‘ऑनर किलिंग’ का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। तथाकथित ‘झूठी शान’ की खातिर एक पिता ने अपनी 18 वर्षीय अविवाहित और गर्भवती बेटी को बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया। क्रूरता और पछतावे का अजीबोगरीब मेल यह रहा कि हत्या के बाद पिता ने बेटी के शव के पैर छूकर माफी भी मांगी। इसके बाद पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसने खुद ही थाने जाकर बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। जब दिल्ली पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ कर मामले की परतें खोलीं, तो जो सच सामने आया उसने जांच अधिकारियों को भी सन्न कर दिया।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बासौनी थाना क्षेत्र का रहने वाला यह परिवार लंबे समय से दक्षिण दिल्ली के तिगड़ी इलाके में निवास कर रहा था। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि 18 साल की युवती के अविवाहित होने के बावजूद गर्भवती होने की जानकारी सामने आ गई थी। इस बात को लेकर परिवार में भारी आक्रोश था और इसी कथित ‘इज्जत’ को बचाने के लिए खौफनाक साजिश रची गई। मुख्य आरोपी पिता लखपत 29 जुलाई को अपनी बेटी को इलाज और दवा दिलाने का झांसा देकर दिल्ली से आगरा ले आया। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात में आरोपी के दामाद ने भी उसका पूरा साथ दिया और दोनों ने मिलकर युवती को चंबल नदी के गहरे पानी में डुबोकर मार डाला।

वारदात को अंजाम देने के बाद, पिता ने बड़ी ही चालाकी से तिगड़ी थाने (दिल्ली) पहुंचकर बेटी के लापता होने की झूठी कहानी गढ़ी। शुरुआती दौर में पुलिस इसे एक सामान्य गुमशुदगी का मामला ही मान रही थी, लेकिन तफ्तीश के दौरान परिवार के बयानों में लगातार विरोधाभास नजर आने लगा। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस का शक गहराया और कड़ाई से पूछताछ की गई, तो आखिरकार पिता टूट गया और उसने अपना खौफनाक जुर्म कबूल कर लिया।आरोपी की निशानदेही पर दिल्ली पुलिस की टीम उसे और उसके दामाद को लेकर आगरा के बासौनी थाना क्षेत्र स्थित चंबल के बीहड़ों में पहुंची।

फिलहाल पीएसी के गोताखोरों की मदद से चंबल नदी में युवती के शव की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। हालांकि, लगातार हो रही बारिश और दुर्गम रास्तों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। घटनास्थल का इलाका इतना बीहड़ है कि वहां तक पहुंचने के लिए टीमों को करीब पांच किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ रहा है, क्योंकि बारिश के चलते वहां दोपहिया या चारपहिया वाहनों का पहुंचना पूरी तरह नामुमकिन हो गया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर आगरा (पूर्वी) के डीसीपी अभिषेक अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला सीधे तौर पर दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र का है और एफआईआर भी दिल्ली में ही दर्ज की गई है, इसलिए मामले की जांच प्रभावित न हो, इसे देखते हुए कोई भी आधिकारिक जानकारी दिल्ली पुलिस द्वारा ही साझा की जाएगी। फिलहाल पुलिस सभी तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए चंबल के पानी में उस अभागी बेटी के शव की तलाश में जुटी है।

बंगाल की खाड़ी का चक्रवाती सिस्टम बदलेगा मौसम, 27 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश के आसार…

28 और 29 अक्टूबर को भारी से अति भारी वर्षा की संभावना, अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान 1 से 3 डिग्री तक गिरेगा; रायगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क
त्योहारी सीजन के बीच छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहा मौसमी तंत्र प्रदेश में बारिश की गतिविधियों को तेज कर सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 27 अक्टूबर से राज्य में वर्षा का दौर शुरू होने की संभावना है, जबकि 28 और 29 अक्टूबर को कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है, लेकिन अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने के संकेत हैं।

27 अक्टूबर से बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, आगामी 27 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ में मौसम की गतिविधियां बढ़ने लगेंगी। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के प्रभाव से आसमान में बादल छाने और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। 28 और 29 अक्टूबर को मौसमी तंत्र का प्रभाव अधिक रहने का अनुमान है। इस दौरान प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।
मौसम में होने वाला यह बदलाव जनजीवन के साथ ही कृषि गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है। धान की कटाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए बारिश परेशानी का कारण बन सकती है। वहीं, बाजारों और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी मौसम के बदलाव का असर पड़ने की आशंका है।

चक्रवाती तूफान में बदल सकता है निम्न दबाव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व और उससे सटे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके लगातार मजबूत होने की संभावना है। अनुमान है कि यह मौसमी तंत्र 24 अक्टूबर तक अवदाब (Depression), 25 अक्टूबर तक गहन अवदाब (Deep Depression) और 26 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) में तब्दील हो सकता है।
इस सिस्टम के प्रभाव से समुद्र से बड़ी मात्रा में नमी मध्य भारत की ओर पहुंचेगी। इसी के चलते छत्तीसगढ़ में 27 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां जोर पकड़ सकती हैं। 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा की स्थिति बनने की भी आशंका है।

अगले तीन दिनों में गिरेगा न्यूनतम तापमान
प्रदेश में बारिश के संभावित दौर से पहले रात के तापमान में गिरावट का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कमी आ सकती है। इससे रात और सुबह के समय ठंडक बढ़ने के साथ हल्की सिहरन महसूस होगी।
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में मौसम शुष्क रहा। इस दौरान रायपुर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 13.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

रायगढ़ में फिलहाल साफ रहेगा आसमान
रायगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। 24 अक्टूबर को शहर में आसमान मुख्यतः साफ रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
आगामी दो दिनों तक मौसम में विशेष बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन 27 अक्टूबर से सक्रिय होने वाले मौसमी तंत्र के प्रभाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषकर किसानों को कटाई और फसल के सुरक्षित भंडारण की तैयारी मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर करनी होगी। गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी के मद्देनजर खुले स्थानों में रहने से बचने की सलाह भी महत्वपूर्ण होगी।

रायगढ़ में अवैध शराब रेड के दौरान पुलिस टीम से धक्का-मुक्की, 3 महिलाओं सहित 4 अरेस्ट…

रायगढ़। जूटमिल थाना क्षेत्र के ग्राम गढ़उमरिया में ‘ऑपरेशन आघात’ के तहत अवैध शराब के खिलाफ दबिश देने गई पुलिस टीम के साथ धक्का-मुक्की करने और शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने तीन महिलाओं और एक युवक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गैर-जमानती धाराओं के तहत दो अलग-अलग मामले दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

तलाशी में 66 पाव देशी शराब और नकदी बरामद

पुलिस के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 की रात थाना जूटमिल को सूचना मिली थी कि ग्राम गढ़उमरिया निवासी पिताम्बर उर्फ फुंदु लहरे अवैध रूप से शराब बनाकर बिक्री कर रहा है। सूचना के आधार पर प्रशिक्षु उप निरीक्षक दिव्या बंजारे के नेतृत्व में सहायक उप निरीक्षक नरसिंहनाथ यादव और आरक्षकों की टीम गवाहों के साथ मौके पर पहुंची। संदेही के मकान की घेराबंदी के दौरान थैला लेकर भाग रहे पिताम्बर लहरे (24) को दौड़ाकर पकड़ा गया।

तलाशी लेने पर उसके पास मौजूद थैले से 180 एमएल क्षमता वाली 66 प्लास्टिक बोतलों में कुल 11.880 बल्क लीटर देशी मसाला शराब और शराब बिक्री की रकम 400 रुपये बरामद की गई। जब्त शराब की अनुमानित कीमत 5,600 रुपये आंकी गई है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस से की गई धक्का-मुक्की

पुलिस जब गवाहों के समक्ष जब्ती और वीडियोग्राफी की प्रक्रिया पूरी कर रही थी, तभी आरोपी ने पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश की। इसी दौरान घर की महिलाओं द्वारा आवाज दिए जाने पर मौके पर दो अन्य महिलाएं पहुंच गईं। आरोप है कि बीना लहरे, रजनी मिरी और अन्य महिलाओं ने प्रशिक्षु उप निरीक्षक दिव्या बंजारे के साथ गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की की और सरकारी कार्रवाई में रुकावट डाली। हालांकि, मौके पर मौजूद बल ने हालात को संभालते हुए सभी को अभिरक्षा में ले लिया।

दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज, आरोपी भेजे गए जेल

जूटमिल पुलिस ने अवैध शराब बरामदगी के मामले में अपराध क्रमांक 651/2026 दर्ज करते हुए आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) और 59(क) के तहत कार्रवाई की है। वहीं, लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने और आपराधिक बल प्रयोग के आरोप में अपराध क्रमांक 654/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पिताम्बर उर्फ फुंदु लहरे (24), बीना लहरे (26), दुमेश्वरी लहरे (50) निवासी ग्राम गढ़उमरिया तथा रजनी मिरी (30) निवासी कुसापास, सुंदरगढ़ (ओडिशा) शामिल हैं।

शासकीय कार्य में बाधा डालने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने कहा कि अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ रायगढ़ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस या किसी भी शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ सख्ती से वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

शिव शक्ति स्टील प्लांट के धुएं से ग्रामीण परेशान…

रायगढ़। दीपावली के पहले औद्योगिक प्रदूषण को लेकर रायगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने शिव शक्ति स्टील प्लांट से निकलने वाले धुएं और धूल से आसपास के वातावरण पर असर पडऩे की शिकायत की है। उनका आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला काला धुआं और उड़ती धूल लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र की सडक़ों पर उडऩे वाली बारीक धूल से दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है। धूल आंखों में जाने और सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि सडक़ पर धूल का गुबार होने से वाहन चलाना मुश्किल हो जाता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण के साथ सडक़ सुरक्षा के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि प्लांट के आसपास पेड़-पौधों की पत्तियों पर काली धूल जम रही है। इससे क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका जताई जा रही है। किसानों को भी फसलों पर औद्योगिक धूल जमने से संभावित नुकसान की चिंता है। हालांकि, प्रदूषण के वास्तविक स्तर और फसलों पर इसके प्रभाव की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर संबंधित विभागों और जिला प्रशासन तक शिकायत पहुंचा चुके हैं, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली है। उन्होंने पर्यावरण विभाग और प्रशासन से प्लांट के उत्सर्जन, धूल की स्थिति और आसपास की वायु गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि जांच में पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थिति और चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायतों के संबंध में संबंधित विभागों की जांच या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रदूषण के स्तर, उसके प्रभाव और शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासन तथा पर्यावरण विभाग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।