35 हजार की घूस लेते ACB ने एक ही विभाग के तीन को पकड़ा मचा हड़कंप…

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जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 20 मार्च को बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के तीन अधिकारियों/कर्मचारियों को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में विभाग के सहायक अभियंता, उप अभियंता और सहायक ग्रेड-1 स्तर के कर्मचारी शामिल हैं। यह रिश्वत एक नए उद्योग के लिए ट्रांसफार्मर और मीटर लगाने के एवज में मांगी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

जांजगीर निवासी शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार यादव ग्राम खोखसा में अपना एक ‘फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट’ (ईंट भट्ठा) स्थापित करना चाहते थे। इसके संचालन के लिए उन्हें ट्रांसफार्मर और बिजली मीटर की आवश्यकता थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने नियमानुसार सीएसपीडीसीएल (CSPDCL) कार्यालय, जांजगीर में आवेदन किया और तय डिमांड नोट की राशि भी जमा कर दी थी। सरकारी शुल्क जमा करने के बावजूद, अधिकारी उनका काम करने के बजाय उन्हें दफ्तर के चक्कर कटवा रहे थे।

35 हजार रुपये की थी मांग

इसी दौरान शिकायतकर्ता की मुलाकात विभाग के सहायक अभियंता विजय नोर्गे, उप अभियंता राजेंद्र शुक्ला और सहायक ग्रेड-1 देवेंद्र राठौर से हुई। इन तीनों ने मिलकर काम को जल्द पास करने के एवज में 35 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।

एसीबी ने बिछाया जाल

शिकायतकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ थे और उन्होंने रिश्वत देने के बजाय बिलासपुर एसीबी में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत का गुप्त रूप से सत्यापन करवाया। शिकायत सही पाए जाने के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए एक विशेष ट्रैप (जाल) बिछाया गया।

दफ्तर में मचा हड़कंप

योजना के तहत 20 मार्च को शिकायतकर्ता रिश्वत की रकम लेकर सीएसपीडीसीएल कार्यालय पहुंचा। जैसे ही सहायक अभियंता विजय नोर्गे, उप अभियंता राजेंद्र शुक्ला और सहायक ग्रेड-1 देवेंद्र राठौर ने 35 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, वहां पहले से सादे कपड़ों में मुस्तैद एसीबी की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। एसीबी की इस अचानक हुई छापेमारी से बिजली विभाग के कार्यालय में भारी हड़कंप मच गया और कई कर्मचारी अपनी सीटों से नदारद हो गए।

कानूनी कार्रवाई शुरू

एसीबी ने तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) 1988 की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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