चार खरीदी केंद्रों में बोगस खरीदी, सच्चाई छिपा रहे हैं अधिकारी…

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  • तिउर, तुरेकेला, हालाहुली और लारीपानी में धान ही नहीं, करीब डेढ़ करोड़ का गबन

रायगढ़/इस बार फिर से धान घोटाले का भांडा फूटा है। रिकॉर्ड के हिसाब से समिति में धान है लेकिन मौके पर नहीं है। दो केंद्र तो ऐसे हैं जहां एक बोरा भी नहीं है। सख्ती के बावजूद बोगस खरीदी होने पर नोडल अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने क्या देखा? अब राजनीतिक जुगाड़ लगाकर राइस मिलर्स से एडजस्ट करवाया जा रहा है। इस बार धान की बोगस खरीदी, रीसायक्लिंग को रोकने के लिए बहुत ज्यादा सख्ती की गई थी। प्रबंधक के ऊपर ब्लॉक नोडल, जिला नोडल को बैठाया गया था जो रोज धान खरीदी का जायजा लेते थे।

पटवारियों और कृषि अधिकारियों को किसानों के पीछे लगाया गया ताकि दबाव डालकर रकबा सरेंडर करवाया जा सके। धान खरीदी तो नियंत्रित कर ली गई लेकिन समितियों में घोटालों को होने दिया गया। फिर से प्रबंधकों और ऑपरेटरों ने बिना धान लाए बोगस खरीदी दर्ज कर दी। अब उठाव अंतिम चरण में पहुंचा है तो पता चला कि तुरेकेला, तिउर, हालाहुली और लारीपानी में बोगस खरीदी कर ली गई। बिना धान लाए किसानों से सांठगांठ कर रिक्त रकबे पर धान चढ़ा लिया गया। इसका भुगतान भी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से हो चुका है। उठाव के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड के हिसाब से इन केंद्रों में धान है लेकिन हकीकत में यहां धान ही नहीं बचा है।

खरसिया के हालाहुली में 1168 क्विं., तिउर में 1098 क्विं., तुरेकेला में 369 क्विं. और लारीपानी में 230 क्विं. धान शेष है। उपार्जन केंद्रों में धान ही नहीं है। यह सच्चाई अब अफसर छिपा रहे हैं क्योंकि उनकी लापरवाही सामने आएगी। ब्लॉक नोडल और जिला नोडल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रबंधकों को उनकी मर्जी से काम करने दिया गया जिसकी वजह से गबन हुआ। कापू केंद्र में भी 5 हजार क्विंटल से अधिक धान बचा है। सत्यापन में यहां भी कमी मिल सकती है।

राईस मिलर्स ले रहे धान का पैसा
वर्तमान में रायगढ़ जिले में 25 केंद्रों में 13679 क्विं. धान बाकी है। राइस मिलों को डीओ जारी किया गया था लेकिन धान नहीं होने के कारण उठाव नहीं हो रहा है। इसे एडजस्ट करने का तरीका भी बहुत दिलचस्प है। अब राइस मिलर्स को प्रबंधकों से डील करने कहा जा रहा है। प्रबंधक भी डीएम के बदले मिलर्स को 20-25 रुपए किलो की दर से भुगतान करेंगे। कुछ पेमेंट अभी किया जाएगा और कुछ बाद में। मिलर्स डील होने के बाद उठाव करने की सूचना पोर्टल में दे देंगे। जो धान है ही नहीं उसका भी सौदा किया जा रहा है। रबी का धान भी आने में कुछ समय बाकी है।

तिउर को बचाने में लगा राईस मिलर
रायगढ़ जिले के इतिहास में हालाहुली, तुरेकेला, तिउर और लारीपानी धान घोटाले को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। वर्ष 24-25 में तिउर में 9030 क्विं., टेंडा नवापारा में 7163 क्विं. और तमनार में 4993 क्विं. धान की कमी पाई गई थी। तिउर में गबन पर प्रबंधक तिहारुराम जायसवाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। अब वहां तिहारु का बेटा डमरुधर प्रबंधक है। मजे की बात यह है कि सबको मालूम था फिर से इस बार गबन होगा। लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाया। अब तिउर के धान कमी को बराबर करने की जिम्मेदारी राईस मिलर को मिली है।

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