सहकारिता का ‘क्राइम थ्रिलर’ मॉडल: बानीपाथर TSS में सील-साइन के ऊपर लिख दी चहेते की नियुक्ति, शिकायत हुई तो बढ़ा दी 15 हजार सैलरी!

सहकारिता का ‘क्राइम थ्रिलर’ मॉडल: बानीपाथर TSS में सील-साइन के ऊपर लिख दी चहेते की नियुक्ति, शिकायत हुई तो बढ़ा दी 15 हजार सैलरी!

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रायगढ़/खरसिया। छत्तीसगढ़ की साय सरकार भले ही करप्शन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का डंडा चला रही हो, लेकिन सहकारिता विभाग के कुछ सूरमाओं को शायद इस बात का जरा भी खौफ नहीं है। एफआईआर होने और जेल की हवा खाने के बाद भी दागी प्रबंधकों की री-एंट्री और अपनों पर ‘रेवड़ी’ लुटाने का एक ऐसा खेल सामने आया है, जिसे देखकर बड़े-बड़े शातिर भी दंग रह जाएं। पूरा मामला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (TSS) बानीपाथर का है, जहां नियमों का ‘मर्डर’ करके एक चहेते को बैकडेट में नौकरी देने और सरकारी तिजोरी खाली करने का सनसनीखेज कारनामा उजागर हुआ है।

खेल: खाली लाइनों का ‘मास्टरस्ट्रोक’, हस्ताक्षरों के ऊपर ही घुसेड़ दी इबारत

शिकायत के मुताबिक, अपने बेहद करीबी चंद्रकुमार को दिसंबर 2024 से मलाई खिलाने के लिए सरकारी खजाने से हर महीने सैलरी बांटी जा रही थी। जब इस अंधेरगर्दी के खिलाफ स्थानीय निवासी प्रदीप वैष्णव ने एसडीएम (SDM) की चौखट पर दस्तक दी, तो महकमे में हड़कंप मच गया।

इस तगड़ी शिकायत के बाद फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए जो ‘क्रिएटिविटी’ दिखाई गई, वो हैरान करने वाली है। पुराने बैठक रजिस्टर में तीन प्रस्ताव पास होने के बाद, पदाधिकारियों के हस्ताक्षरों के बीच जो दो लाइनें खाली बची थीं, ठीक वहीं चंद्रकुमार की बैकडेट नियुक्ति की कहानी लिख दी गई। कलम की लिखावट और स्याही का रंग खुद चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि यह खेल बाद में किसी ‘खास हाथ’ से रचा गया है।

चोरी और सीनाजोरी: अमूमन बैठकों के बाद 3-4 लाइनें छोड़कर सील-साइन किए जाते हैं, जो कि सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन इस विवादित पन्ने पर अधिकारियों के हस्ताक्षरों के ठीक ऊपर चढ़ी हुई नई स्याही विभाग के पारदर्शी दावों की पोल खोल रही है।

तमाशा: जांच के नाम पर खुली ‘खानापूर्ति’, एक और नई लाइन ठूंसी!

इस हाई-वोल्टेज मामले का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब इसकी जांच रायगढ़ के प्रभारी उपायुक्त (सहकारिता) के पास पहुंची। आरोप है कि जांच अधिकारियों ने इस संदेहास्पद और ओवर-राइटिंग वाले रजिस्टर का फॉरेंसिक टेस्ट कराने के बजाय, आरोपियों के बयानों को ही ‘परम सत्य’ मान लिया।

इतना ही नहीं, विभागीय मेहरबानी का आलम देखिए कि जांच के दौरान ही रजिस्टर में तीसरी बार छेड़छाड़ की गई। इस बार अधिकारी और प्रबंधक की सील-साइन के ऊपर एक और नई लाइन ठूंस दी गई, जिसमें लिखा था— ’15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन’। मजे की बात यह है कि इस खुली लीपापोती को देखने के बाद भी जांच अधिकारी ने फाइल को ‘नस्तीबद्ध’ (Close) कर दिया और शिकायतकर्ता को केवल एक कॉपी थमाकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

तीन बड़े सवाल, जो साय सरकार की ‘नीति’ को चुनौती दे रहे हैं:

  1. अंधा कानून: रजिस्टर में साफ दिख रही दोहरी लिखावट और सील के ऊपर चढ़ी हुई नई स्याही जांच अधिकारी की आंखों से कैसे ओझल हो गई? क्या उन्हें यह दिखाई नहीं दिया या देखना नहीं चाहते थे?

  2. तिजोरी पर डाका: बिना किसी वैध भर्ती प्रक्रिया के, बैकडेट में नियुक्ति दिखाकर जो सरकारी पैसा लुटाया गया, उसकी रिकवरी किससे होगी?

  3. दागियों पर मेहरबानी: जो कर्मचारी पहले ही जेल की हवा खा चुके हैं, उन्हें दोबारा उन्हीं संवेदनशील केंद्रों की कमान सौंपना सहकारिता विभाग की कौन सी पॉलिसी है?

ग्रामीणों ने कहा— ‘करवाओ FSL जांच, खुलेगा बड़ा सिंडिकेट’

शिकायतकर्ता प्रदीप वैष्णव और क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और FSL (फॉरेंसिक) जांच की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर इस रजिस्टर की बारीकी से जांच हो जाए, तो सिर्फ बानीपाथर ही नहीं, बल्कि खरसिया क्षेत्र की कई अन्य समितियों में चल रहे करोड़ों के भर्ती और सैलरी घोटाले के सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘ओपन एंड शट’ केस पर कड़ा एक्शन लेता है या भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना जारी रखता है।

आरोपी खुद मान रहा ‘बाद में हुई एंट्री’ — तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक का कबूलनामा

“तीन प्रस्ताव पास होने के बाद जब शिकायत हुई, तब चौथे प्रस्ताव के रूप में बाद में चंद्रकुमार पटेल की नियुक्ति को रजिस्टर में दर्ज किया गया है। इसकी जांच हो चुकी है और मामला कलेक्टर के पास भी है। रही बात 15 हजार रुपये वेतन वाली लाइन की, तो वह मेरे कार्यकाल में नहीं लिखी गई। वह कब और किसने लिखी, मुझे नहीं पता।” — तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बानीपाथर

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