सहकारिता अधिनियम में ओआईसी का पद नहीं, चुनाव नहीं करवा रही सरकार…

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रायगढ़/ प्रदेश की कृषि साख सहकारी समितियां अब केवल चुनावी हथियार बनकर रह गई हैं। अन्य सहकारी समितियों में चुनाव हो रहे हैं लेकिन पैक्स समिति में पार्टी विशेष के समर्थक बैठ गए हैं। हर समिति में ओआईसी बैठे हुए हैं, जिनको सहकारिता अधिनियम में मान्यता ही नहीं है। जबकि 2020 के बाद से ऐसे ही राजनीतिक व्यक्ति को पदासीन किया गया है। इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं। पूर्व की कांग्रेस सरकार ने 2020 में संचालक मंडल भंग करने के बाद सभी विधायकों की अनुशंसा पर अपने समर्थकों को समितियों में बिठाया। 2023 में भाजपा सरकार आई तो लगा कि अब चुनाव होंगे, लेकिन 2024 में ऐन धान खरीदी के पहले सहकारी समितियों को राजनीतिक केंद्र बना दिया गया।

पहले कांग्रेस सरकार और बाद में भाजपा राज में भी समितियों में पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राधिकृत अधिकारी बनाने का आदेश दिया गया। मंत्रालय से आई अनुशंसा के आधार पर आदेश भी जारी कर दिया गया, जिसमें 64 समितियों में अशासकीय व्यक्तियों को ओआईसी बनाया गया, तब से वही लोग समितियों को चला रहे हैं। प्रबंधक को कठपुतली की तरह यही ओआईसी अपने इशारे पर नचा रहे हैं। चार महीने बाद फिर से धान खरीदी शुरू हो जाएगी। बिना संचालक मंडल के किसानों का प्रतिनिधित्व खत्म हो चुका है। प्राधिकृत अधिकारी राजनीतिक होने के कारण किसान भी अपनी बात सामने नहीं ला पाते हैं। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई भी इसीलिए नहीं हो रही है क्योंकि इसके पीछे अप्रत्यक्ष रूप से ओआईसी की भूमिका है।

सहकारिता अधिनियम में नहीं है प्रावधान
जब ओआईसी की नियुक्ति की गई थी, तब इसे वैकल्पिक रूप से छह महीने के लिए अपनाया गया था। इसके बाद सहकारी समितियों में चुनाव करवाए जाने थे। कांग्रेस सरकार ने समितियों में भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए अपने समर्थकों को ओआईसी बनाया। भाजपा ने भी यही किया। अब करीब छह साल हो चुके हैं, लेकिन चुनाव नहीं करवाए गए। सहकारिता अधिनियम में ओआईसी को इतने लंबे समय तक रखने का प्रावधान ही नहीं है।

इनकी हुई थी नियुक्ति
2023 में 69 समितियों में से 64 में नई नियुक्ति की गई थी। जतरी में जीवनलाल पटेल, तिलगी में अनिता सिदार, केशला में किशोर गुप्ता, लोइंग में मोती पटेल, जामगांव में भागीरथी बिश्वाल, बंगुरसिया में मनोज पटेल, टारपाली में जयानंद साव, तारापुर में त्रिलोचन पटेल, नंदेली में जयप्रकाश पटेल, राजपुर में तिलकराम राठिया, लारीपानी में सुकसिंह राठिया, लैलूंगा में सुकदेव सिदार, मुकडेगा में रामप्रसाद पैंकरा, लिबरा में सूरजभान भगत, तमनार के सराईटोला में जयपाल सिंह राठिया, खम्हरिया में नोहर सिदार, उरबा में चक्रधर सिंह राठिया, खम्हार में गुलाबसिंह राठिया, कापू में संतराम राठिया, सिसरिंगा में बोधसिंह राठिया, छाल में अमीलाल राठिया, खडग़ांव में सालिकराम राठिया, घरघोड़ा में तुलाराम पैंकरा, कुडुमकेला में रूपसिंह राठिया, छर्राटांगर में भूपेंद्र राठिया, कुर्मीभौना में फिरसिंह राठिया, हालाहुली में देवप्रसाद उरांव, चपले में हितराम सिदार, जैमूरा में खगेश्वर सिदार, बानीपाथर में भीमसिंह राठिया आदि को नियुक्त किया गया था।

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