UCC (यूसीसी) परामर्श बैठक में राष्ट्रीय मछुआरा संघ के प्रतिनिधि हुए शामिल…

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मछुआरा समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों की सुरक्षा पर दिया बल, ‘लिव-इन संबंध’ के प्रावधान पर जताया पुरजोर विरोध..

रायपुर: 27/08/2026। गुरुवार को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के उद्देश्य से गठित उच्चस्तरीय समिति के तत्वावधान में रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस के कन्वेंशन हॉल में एक विस्तृत राज्यस्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ UCC समिति की अध्यक्षा माननीय न्यायमूर्ति (से.नि.) रंजना प्रकाश देसाई ने की। इस अवसर पर समिति के सम्मानित सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह (से.नि.भा.प्र.से.), श्री एम. के. राऊत (से.नि.भा.प्र.से.), श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) एवं श्रीमती ज्योति रानी सिंह (से.नि. प्राचार्या व महिला सदस्य) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक में राज्य सरकार के विभिन्‍न मंडलों व बोर्डों के अध्यक्षों सहित प्रदेश के सभी धर्मों, जनजातियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और कानून के विभिन्‍न सामाजिक व व्यावहारिक पहलुओं पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

मछुआरा समाज के रीति-रिवाजों व महासभा नियमावली पर विशेष चर्चा:

बैठक में राष्ट्रीय मछुआरा संघ के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सहभागिता करते हुए मछुआरा समाज की सदियों पुरानी पारंपरिक व्यवस्था, ग्राम स्तर की पंचायत प्रणाली, समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों तथा महासभा की नियमावली का पक्ष प्रमुखता से रखा।

प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि मछुआरा समाज में शादी-विवाह, भरण-पोषण (परिवार व आश्रितों की आर्थिक सुरक्षा) तथा उत्तराधिकार एवं संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों पर वर्षों से एक सुसंगत पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था लागू है। समाज का मानना है कि UCC कानून के लागू होने की प्रक्रिया में मछुआरा समाज के इन पारंपरिक रीति-रिवाजों, सामाजिक अधिकारों और ग्राम स्तरीय न्याय व्यवस्था के अस्तित्व को कोई क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।

‘लिव-इन संबंध’ के प्रावधान पर जताया पुरजोर विरोध:

चर्चा के दौरान मछुआरा समाज के प्रतिनिधियों ने कानून में ‘लिव-इन रीलेशन संबंध’ से जुड़े प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया। संघ के नेताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, ग्रामीण परंपराओं और सामाजिक मर्यादा के दृष्टिकोण से ‘लिव-इन संबंध’ की व्यवस्था समाज के नैतिक व पारिवारिक ढांचे को कमजोर करती है। प्रतिनिधिमंडल ने समिति से पुरजोर मांग की कि समाज की मर्यादा और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस बिंदु पर पुनर्विचार किया जाए। बैठक में सम्मिलित प्रमुख प्रतिनिधि: श्रीमती गायत्री गायग्वाल – प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय मछुआरा संघ,मनहरण धीवर – महामंत्री, राष्ट्रीय मछुआरा संघ, सुरेश ढीमर– प्रदेश अध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ), राष्ट्रीय मछुआरा संघ, रूपचंद धीवर – विधानसभा अध्यक्ष (धमतरी),राजेंद्र धीवर एवं श्री भागीरथी मटियारा शामिल हुए…

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