1 सितंबर से ऑनलाइन शॉपिंग पर बढ़ेगा बोझ! डिलीवरी चार्ज में हुई बढ़ोतरी, त्योहारों से पहले जेब पर असर…

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अगर आप त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी करने की तैयारी कर रहे हैं तो सितंबर की शुरुआत से आपकी जेब पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery ने डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स के लिए शिपिंग शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला किया है। नई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होंगी। इसका सीधा असर ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों की लागत पर पड़ेगा और आगे चलकर कुछ उत्पादों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।

एक सितंबर से कितना महंगा होगा शिपमेंट?

कंपनी की ओर से D2C ग्राहकों को भेजे गए ईमेल के मुताबिक, एक्सप्रेस शिपमेंट पर प्रति पैकेज ₹4 और सरफेस शिपमेंट पर ₹2 का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यह रकम मौजूदा शिपिंग शुल्क के ऊपर होगी। डिलीवरी की कुल लागत पहले की तरह पार्सल के वजन और उसे पहुंचाने की दूरी जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, खासकर 500 ग्राम से अधिक वजन वाले पैकेज में डिलीवरी लागत करीब 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। यानी ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहक को हर ऑर्डर पर सीधे ₹4 या ₹2 अतिरिक्त नहीं देना होगा, लेकिन अगर कंपनियां बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागत को उत्पाद की कीमत या डिलीवरी शुल्क में शामिल करती हैं, तो इसका असर ग्राहक तक पहुंच सकता है।

क्यों बढ़ाई गई डिलीवरी की लागत?

Delhivery ने बढ़ोतरी के पीछे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की बढ़ती लागत को प्रमुख वजह बताया है। एविएशन फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी, ग्राउंड स्टाफ पर बढ़ता खर्च और पूरे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर महंगाई का दबाव कंपनी के अनुसार लागत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। त्योहारी सीजन से ठीक पहले यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले महीनों में ऑनलाइन ऑर्डर का वॉल्यूम तेजी से बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे समय में लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए हर पार्सल की लागत में मामूली वृद्धि भी बड़े स्तर पर असर डाल सकती है।

सबसे ज्यादा असर D2C कंपनियों पर

इस फैसले का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। D2C यानी Direct-to-Consumer मॉडल में कंपनी किसी पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर या रिटेल चैनल के बजाय सीधे ग्राहक को सामान बेचती है।Mamaearth, boAt और Wakefit जैसी कंपनियां इस मॉडल से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के लिए शिपिंग लागत में बढ़ोतरी इसलिए अहम है क्योंकि कई D2C ब्रांड अपेक्षाकृत कम मार्जिन पर काम करते हैं। लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने पर उनके सामने लागत खुद वहन करने या उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने का विकल्प रह सकता है।

त्योहारी खरीदारी पर कितना पड़ेगा असर?

त्योहारों के दौरान ऑनलाइन खरीदारी में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मेटिक्स, होम फर्निशिंग और रोजमर्रा के कई उत्पादों की मांग बढ़ती है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित रहता है या उत्पादों की कीमतों तक पहुंचता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित ब्रांड अतिरिक्त लागत को किस तरह संभालते हैं। फिलहाल बढ़ोतरी D2C ब्रांड्स के लिए लागू होने वाले शिपिंग शुल्क से जुड़ी है। इसलिए इसे सीधे हर ऑनलाइन ग्राहक के लिए डिलीवरी चार्ज में ₹2 से ₹4 की बढ़ोतरी मानना सही नहीं होगा।

त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले अब नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागत का कितना हिस्सा कंपनियां खुद उठाती हैं और कितना बोझ आखिरकार ग्राहकों तक पहुंचता है।

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