नेपाल जलप्रलय: मलबे से उठती दुर्गंध और अपनों का इंतजार, 626 मौतें और 2,400 से ज्यादा अब भी लापता…

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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का खौफनाक मंजर अब एक गहरे दर्द में बदल चुका है। सैलाब तो थम गया है, लेकिन अपनों को खोने वालों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। काठमांडू के अस्पतालों और मॉर्चरी के बाहर बेबस परिवारों की भारी भीड़ जमा है। कोई हाथों में अपनों की तस्वीर लिए खड़ा है, तो कोई पुलिस की उस लिस्ट में चमत्कार तलाश रहा है, जो ये बता सके कि उनका अपना जिंदा है या नहीं। गल्छी जैसे प्रभावित इलाकों में मलबे में दबी लाशों से अब असहनीय दुर्गंध उठने लगी है, जिसने राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का खौफनाक मंजर अब एक गहरे दर्द में बदल चुका है। सैलाब तो थम गया है, लेकिन अपनों को खोने वालों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। काठमांडू के अस्पतालों और मॉर्चरी के बाहर बेबस परिवारों की भारी भीड़ जमा है। कोई हाथों में अपनों की तस्वीर लिए खड़ा है, तो कोई पुलिस की उस लिस्ट में चमत्कार तलाश रहा है, जो ये बता सके कि उनका अपना जिंदा है या नहीं। गल्छी जैसे प्रभावित इलाकों में मलबे में दबी लाशों से अब असहनीय दुर्गंध उठने लगी है, जिसने राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

अस्पतालों के बाहर अपनों की तलाश, दीवारों पर चिपके पोस्टर

काठमांडू के अस्पतालों के बाहर का नजारा बेहद हृदयविदारक है। दीवारों पर लापता लोगों के पोस्टर चस्पा किए गए हैं। पुलिसकर्मी लगातार नाम और जानकारियां दर्ज कर रहे हैं, और परिजन बार-बार उन सूचियों को खंगाल रहे हैं। त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल में भी यही हाल है। मंदिरा काफ्ले नाम की महिला भी अपने लापता रिश्तेदार की तलाश में दर-दर भटक रही हैं। सैलाब वाले दिन उनकी आखिरी बार बात हुई थी, उसके बाद से फोन खामोश है। इसी तरह, अस्पताल में बनाए गए पूछताछ केंद्र पर एक शख्स अपने भाई की तलाश में पहुंचा है, जिसके पास एक वीडियो है जिसमें सेना के जवान उसके भाई को बचाते दिख रहे हैं, लेकिन अब वह कहां है, इसका किसी को अता-पता नहीं है। यहां महाराष्ट्र से आए कुछ लोग भी भारतीयों की तलाश में जुटे हुए हैं। सूचियों में दर्ज कई नामों के आगे यह भी नहीं पता कि वे कहां के रहने वाले हैं।

लाशों की दुर्गंध से गल्छी इलाके में घुट रहा दम

सैलाब के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती मलबे से शवों को निकालने की है। नेपाल के गल्छी इलाके में फावड़ों से मलबा हटाकर लाशें खोजी जा रही हैं। लेकिन, बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई लाशें अब मलबे के नीचे सड़ने लगी हैं। इलाके में उठ रही भीषण दुर्गंध ने स्थानीय लोगों और बचाव दल का दम घोंट दिया है। लोगों को मुंह पर कपड़ा बांधकर काम करना पड़ रहा है।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के कारण नदियों में बनी नई कृत्रिम झीलों के टूटने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे दोबारा बाढ़ आने की आशंका है। ऐसे में जो लोग सुरक्षित स्थानों पर लौट आए हैं, उन पर भी दहशत का साया बरकरार है। अपनों को खोजने की आस में बैठे परिवारों के लिए हर गुजरता दिन किसी सदमे से कम नहीं है।

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