रायगढ़ का ‘ब्लैक संडे’: ढिमरापुर की जर्जर सड़क और कोतरा आरओबी पर भारी वाहनों के कहर ने लील लीं दो जिंदगियां, एक महिला और रिटायर्ड शिक्षक की मौत, सड़क पर उतरा जनाक्रोश.. देखें CCTV Video…

रायगढ़ का ‘ब्लैक संडे’: ढिमरापुर की जर्जर सड़क और कोतरा आरओबी पर भारी वाहनों के कहर ने लील लीं दो जिंदगियां, एक महिला और रिटायर्ड शिक्षक की मौत, सड़क पर उतरा जनाक्रोश.. देखें CCTV Video…

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रायगढ़/ रायगढ़ शहर की चरमराती यातायात व्यवस्था और बदहाल सड़कें अब आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। रविवार का दिन औद्योगिक नगरी के लिए ‘काला रविवार’ बन गया। महज ढाई घंटे के अंतराल में शहर के दो अलग-अलग हिस्सों में हुए सड़क हादसों ने दो जिंदगियां छीन लीं। पहली घटना ढिमरापुर चौक के पास हुई, जहां सड़क के कीचड़ में स्कूटी फिसलने से 55 वर्षीय नंदकुमारी सिंह भारी वाहन की चपेट में आ गईं। शहर इस हादसे से उबर भी नहीं पाया था कि कोतरा रोड ओवरब्रिज पर तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से 70 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक खूबचंद नायक की मौत हो गई।

उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। दो हादसे, दो मौतें और दोनों के पीछे सड़क व यातायात व्यवस्था से जुड़े सवाल। ढिमरापुर से कोतरा रोड ओवरब्रिज तक का यह मार्ग हाईवे है और रायगढ़ सिटी कोतवाली क्षेत्र में आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर हर तीन-चार दिन में कोई न कोई दुर्घटना होती रहती है। इसके बावजूद व्यवस्था की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही। रविवार की दो मौतों ने आखिरकार लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया और कोतरा रोड पर शव सड़क पर रखकर चक्काजाम करना पड़ा।

ढिमरापुर में कीचड़ में फिसली स्कूटी, ट्रक ने महिला को कुचला

रविवार सुबह करीब 10 बजे ढिमरापुर चौक और इंडियन पेट्रोल पंप के पास सड़क की हालत हादसे का कारण बनी। बारिश के बाद सड़क पर इतना कीचड़ था कि रास्ते से गुजरना दोपहिया वाहन चालकों के लिए मुश्किल हो गया था। 55 वर्षीय नंदकुमारी सिंह अपने पति के साथ स्कूटी से उर्दना की ओर जा रही थीं। इसी दौरान उनकी स्कूटी कीचड़ में फिसल गई और नंदकुमारी सड़क पर जा गिरीं। तभी वहां से गुजर रहे ट्रक की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद एक और तस्वीर सामने आई, जो व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है।

मौके पर एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। जिस समय एक सड़क हादसे के बाद तत्काल एंबुलेंस की जरूरत थी, उस समय स्थानीय लोगों को शव ले जाने के लिए पिकअप वाहन का सहारा लेना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद शव को पिकअप के पिछले हिस्से में रखकर अस्पताल ले जाया गया। सवाल यह है कि यदि हादसे के बाद एंबुलेंस तक समय पर नहीं पहुंच सकती, तो दुर्घटना की स्थिति में आम नागरिक किस व्यवस्था पर भरोसा करे? सड़क की बदहाली और उसके बाद आपातकालीन सहायता की यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

ढाई घंटे बाद कोतरा रोड ओवरब्रिज पर दूसरी मौत

पहले हादसे के करीब ढाई घंटे बाद कोतरा रोड थाना क्षेत्र के ओवरब्रिज पर दूसरा हादसा हो गया। कुसमुरा निवासी 70 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक खूबचंद नायक अपनी पत्नी के साथ दोपहिया वाहन से ओवरब्रिज से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि खूबचंद नायक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें शहर के अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। एक ही दिन में दो हादसे और दो मौतें। फर्क सिर्फ इतना था कि पहली मौत ढिमरापुर की बदहाल सड़क पर हुई और दूसरी कोतरा रोड ओवरब्रिज पर भारी वाहन की चपेट में आने से।

रात में अंधेरा, दिन में धूल का गुबार : ओवरब्रिज की बदहाली से राहगीर और आसपास के लोग परेशान

कोतरा रोड ओवरब्रिज की स्थिति भी लंबे समय से सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार रात में यहां पर्याप्त लाइटें नहीं जलतीं। जिस ओवरब्रिज पर रात-दिन भारी वाहनों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही रहती है, वहां प्रकाश व्यवस्था का यह हाल दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाता है। दिन में समस्या दूसरी है। भारी वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल इस कदर हावी रहती है कि ट्रक के पीछे चल रहे दोपहिया वाहन चालक को सामने का रास्ता तक स्पष्ट दिखाई नहीं देता। धूल के गुबार के बीच दृश्यता कम होने से अचानक सामने आने वाला वाहन, गड्ढा या कोई अन्य बाधा हादसे का कारण बन सकती है

प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है, जबकि सड़क और यातायात से जुड़े दूसरे इंतजाम प्रशासन के दायरे में आते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब इस मार्ग पर लगातार हादसे हो रहे हैं और धूल-अंधेरे से लोगों की परेशानी रोज बढ़ रही है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर कब स्थायी व्यवस्था करेंगे?

नो-एंट्री है तो भारी वाहन शहर के भीतर कैसे पहुंच रहे?

कोतरा रोड हादसे के बाद लोगों का गुस्सा सिर्फ दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने शहर में भारी वाहनों की आवाजाही और नो-एंट्री व्यवस्था पर यातायात विभाग से सीधे सवाल किए।लोग पूछ रहे हैं  – जब शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू है, तो प्रतिबंधित समय में ये वाहन शहर के भीतर कैसे पहुंच रहे हैं? क्या नो-एंट्री के दौरान भारी वाहनों को यातायात विभाग की ओर से किसी तरह की अनुमति दी जाती है? यदि अनुमति नहीं है, तो प्रतिबंधित समय में शहर के भीतर पहुंचने वाले वाहनों को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई कहां है? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ढिमरापुर से कोतरा रोड तक का मार्ग रोजाना भारी वाहनों और दोपहिया चालकों के बीच संघर्ष का रास्ता बनता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने यातायात व्यवस्था में लापरवाही के साथ अवैध वसूली के आरोप भी लगाए। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों का आक्रोश इस बात का संकेत जरूर है कि नो-एंट्री व्यवस्था को लेकर भरोसे का संकट पैदा हो चुका है।

सड़क पर शव, सामने प्रशासन, अब जवाब की बारी

कोतरा रोड हादसे के बाद आक्रोशित लोगों ने मृतक का शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं तथा प्रदर्शनकारियों से बातचीत की जा रही है। लोगों की मांग साफ है की सड़क की स्थिति सुधारी जाए, ओवरब्रिज की प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त हो, साफ-सफाई और धूल नियंत्रण की व्यवस्था हो तथा भारी वाहनों की नो-एंट्री को कड़ाई से लागू किया जाए। लेकिन सवाल सिर्फ आज के चक्काजाम का नहीं है। सवाल उन हादसों का है जो इस मार्ग पर लगातार होते रहे हैं। यदि स्थानीय लोगों की मानें तो हर तीन-चार दिन में कोई न कोई दुर्घटना होती है। फिर भी व्यवस्था तब तक क्यों नहीं जागती, जब तक किसी परिवार का अपना कोई सदस्य सड़क पर जान नहीं गंवा देता?

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रविवार की दो मौतों ने रायगढ़ की यातायात व्यवस्था के सामने आईना रख दिया है। अब जरूरत हादसे के बाद मौके पर पहुंचने की नहीं, हादसे से पहले व्यवस्था को सड़क पर उतारने की है। आखिर कब तक बदहाल सड़क, अंधेरा, धूल और भारी वाहनों के बीच आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करता रहेगा?

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