कोटवारी जमीन के मामले में अब नपेंगे कई बिल्डर और व्यापारी…

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  • 20 प्रकरणों में कोटवारी जमीनों का मांगा प्रतिवेदन, राजस्व मंडल के आदेश पर होगा अमल

रायगढ़ /राजस्व मंडल के आदेश आखिरकार फाइलों से बाहर आ ही गए। रायगढ़ के बाबूओं ने भूमाफियाओं को बचाने के लिए इन आदेशों को दबा दिया था। बहुत कठोर शब्दों में राजस्व मंडल अध्यक्ष डीएस मिश्र ने आदेश दिए थे। 20 प्रकरणों के आदेश निकाले जा चुके हैं। अब पटवारियों को कहा गया है कि वे भूमि की वर्तमान स्थिति पर प्रतिवेदन दें। इसके बाद कार्रवाई होगी।कोटवारी जमीनों की अवैध खरीदी-बिक्री का मामला लंबे समय से अटका हुआ है। राज्य सरकार ने सभी कोटवारी जमीनों को सेवा भूमि अहस्तांतरणीय दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन उसके पहले ही कई जगहों की कोटवारी भूमि बिक चुकी थी।

रायगढ़ के कारोबारियों ने सांठगांठ करके करीब 34 गांवों में मौजूद कोटवारी जमीनों की बिक्री की अनुमति जारी करवा ली थी। एक ही दिन में राजस्व मंडल ने करीब 34 प्रकरणों में आदेश हो पारित किए थे। इन प्रकरणों को बाद में तत्कालीन अध्यक्ष डीएस मिश्र ने पुनर्विलोकन में लेकर निरस्त किया था। इन प्रकरणों की फाइल जब रायगढ़ पहुंची तो यहां के बाबूओं ने भू-माफियाओं के इशारे पर फाइलें गुमा दीं। कोटवारी भूमि की बिक्री नहीं हो सकती। कलेक्टर भी इसका आदेश नहीं दे सकते क्योंकि यह भूमि कोटवार पद को कृषि कार्य के लिए दिया जाता है। जो भी कोटवार बनता था, वह उस भूमि पर खेती करके जीवन-यापन करता था। रायगढ़ के कारोबारियों ने सांठगांठ करके करीब 34 गांवों में मौजूद कोटवारी जमीनों की बिक्री की अनुमति जारी करवा ली थी। एक ही दिन में राजस्व मंडल ने करीब 34 प्रकरणों में आदेश हो पारित किए थे। इन प्रकरणों को बाद में तत्कालीन अध्यक्ष डीएस मिश्र ने पुनर्विलोकन में लेकर निरस्त किया था। इन प्रकरणों की फाइल जब रायगढ़ पहुंची तो यहां के बाबूओं ने भू-माफियाओं के इशारे पर फाइलें गुमा दीं। कोटवारी भूमि की बिक्री नहीं हो सकती। कलेक्टर भी इसका आदेश नहीं दे सकते क्योंकि यह भूमि कोटवार पद को कृषि कार्य के लिए दिया जाता है। जो भी कोटवार बनता था, वह उस भूमि पर खेती करके जीवन-यापन करता था।

शहर के कई भू-माफियाओं ने कलेक्टर से कोटवारी जमीन खरीदने की अनुमति मांगी। यहां से आवेदन रिजेक्ट होने के बाद राजस्व मंडल में सेटिंग करके अपील की गई। तत्कालीन अध्यक्ष ने सबको अनुमति दे दी, जिसके बाद धड़ाधड़ रजिस्ट्रियां हुईं। इसके बाद सीनियर ब्यूरोक्रेट डीएस मिश्र अध्यक्ष बने तो उन्होंने रायगढ़ जिले के 34 प्रकरणों को मंगवाया। उनको पुनर्विलोकन में लेकर सारे आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही कहा कि अवैधानिक रूप से खरीदी-बिक्री करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही की जाए। अब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 20 प्रकरणों में राजस्व मंडल का आदेश मंगवाया।

शहर के कई भू-माफियाओं ने कलेक्टर से कोटवारी जमीन खरीदने की अनुमति मांगी। यहां से आवेदन रिजेक्ट होने के बाद राजस्व मंडल में सेटिंग करके अपील की गई। तत्कालीन अध्यक्ष ने सबको अनुमति दे दी, जिसके बाद धड़ाधड़ रजिस्ट्रियां हुईं। इसके बाद सीनियर ब्यूरोक्रेट डीएस मिश्र अध्यक्ष बने तो उन्होंने रायगढ़ जिले के 34 प्रकरणों को मंगवाया। उनको पुनर्विलोकन में लेकर सारे आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही कहा कि अवैधानिक रूप से खरीदी-बिक्री करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही की जाए। अब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 20 प्रकरणों में राजस्व मंडल का आदेश मंगवाया।

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