यूथ कांग्रेस चुनाव का महासंग्राम: पर्दे के पीछे दिग्गजों की प्रतिष्ठा, मैदान में युवाओं की सियासी परीक्षा…

यूथ कांग्रेस चुनाव का महासंग्राम: पर्दे के पीछे दिग्गजों की प्रतिष्ठा, मैदान में युवाओं की सियासी परीक्षा…

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रायगढ़/ रायगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा हलचल किसी विधानसभा या निकाय चुनाव को लेकर नहीं, बल्कि युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही जिले की राजनीति का पूरा तापमान बदल गया है। शहर से लेकर खरसिया, पुसौर, धरमजयगढ़ और लैलूंगा तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठकों, चाय की दुकानों और राजनीतिक अड्डों पर एक ही चर्चा सुनाई दे रही है – आखिर युवा कांग्रेस की कमान किसके हाथ जाएगी? कौन सा युवा चेहरा आने वाले वर्षों में संगठन की नई पहचान बनेगा और किसके पीछे सबसे मजबूत जमीनी ताकत खड़ी है? इस चुनाव की सबसे रोचक बात यह है कि यहां दिखाई देने वाली राजनीति से कहीं ज्यादा गतिविधियां पर्दे के पीछे चल रही हैं।

संगठन के नियम किसी भी वरिष्ठ नेता को खुलकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने या समर्थन की घोषणा करने की अनुमति नहीं देते। इसलिए मंच पर लगभग सभी नेता समान दूरी बनाए हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में हर दिन नए समीकरण बनते और बदलते नजर आ रहे हैं। कौन किसके संपर्क में है, किसके लिए कौन कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहा है और किसकी टीम सदस्यता अभियान की तैयारी में जुटी है, इन सब पर कांग्रेस के भीतर लगातार चर्चा हो रही है। रायगढ़ की राजनीति को करीब से देखने वाले जानकारों का मानना है कि जिले में कांग्रेस की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल हैं।

उमेश पटेल को प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है और जिले भर में उनका जो गहरा प्रभाव है, वह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इस चुनाव में विधायक देवेंद्र यादव की इतनी अधिक चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि रायगढ़ में उनका एक ऐसा धड़ा सक्रिय हो गया है जो पहले उमेश पटेल प्रभाव क्षेत्र का ही हिस्सा हुआ करता था। पाला बदलकर अब देवेंद्र यादव गुट में शामिल हुए इन नेताओं की सक्रियता ने स्थानीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, निष्ठाओं के इसी बड़े बदलाव के कारण युवा कांग्रेस का यह चुनाव इतनी चर्चाओं में आ गया है।

हालांकि किसी भी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में पूरा चुनाव इन्हीं दो प्रभाव क्षेत्रों के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है। यह चुनाव केवल जिला अध्यक्ष पद तक सीमित नहीं है। शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष के साथ जिला महासचिव, विधानसभा अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पदों के लिए भी दावेदार मैदान में हैं। इसलिए कांग्रेस के भीतर इसे केवल पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के युवा नेतृत्व की दिशा तय करने वाला संगठनात्मक चुनाव माना जा रहा है।

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नाम पॉलिटिक्स’ के चक्रव्यूह में उलझा चुनाव
शहर जिला अध्यक्ष पद का चुनाव इन दिनों स्थानीय राजनीति में गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय युवा कांग्रेस की अधिकृत डिजिटल बैलेट सूची के अनुसार, इस अहम पद के लिए मुख्य मुकाबला एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष आरिफ हुसैन और जिला युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष रितेश तिवारी के बीच माना जा रहा है। इनके साथ ही संजना श्रीवास, अभिषेक यादव और शुभम सिंह सहित कुल 11 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। बाजार में चल रही चर्चाओं के अनुसार, उमेश पटेल समर्थक समूह से आरिफ हुसैन की दावेदारी बेहद मजबूत मानी जा रही है, जिन्हें युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश पाण्डेय और चक्रधर नगर मंडल अध्यक्ष लोकेश साहू का समर्थन प्राप्त होने की बात कही जा रही है।

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वहीं दूसरी ओर देवेंद्र यादव से जुड़े माने जाने वाले समर्थक समूह की ओर से रितेश तिवारी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटे हैं। उन्हें युवा कांग्रेस शहर अध्यक्ष आशीष जायसवाल और जिला उपाध्यक्ष आशीष यादव का संगठनात्मक समर्थन मिलने की चर्चा है। दो मजबूत खेमों के आमने-सामने होने से मुकाबला कांटे का हो गया है। इस चुनाव की सबसे रोचक और चौंकाने वाली बात ‘नाम पॉलिटिक्स’ यानी हमनाम उम्मीदवारों का मैदान में उतरना है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि समान नाम वाले उम्मीदवारों की मौजूदगी से मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है और इसका असर वोटों के समीकरण पर पड़ सकता है। आईवाईसी की डिजिटल बैलेट सूची में मुख्य दावेदार आरिफ हुसैन के नाम से एक से अधिक प्रविष्टियां दर्ज हैं। लगभग यही स्थिति रितेश तिवारी के नाम को लेकर भी है, जिनके नाम से मिलते-जुलते कई उम्मीदवार सूची में शामिल हैं। सबसे अधिक चर्चा अनमोल अग्रवाल के नाम को लेकर है। वे मूल रूप से पूरे जिले से प्रदेश महासचिव पद के प्रमुख दावेदार हैं, लेकिन शहर जिला अध्यक्ष की बैलेट सूची में भी उनके नाम की एक प्रविष्टि दर्ज है। यही हाल आशीष जायसवाल के नाम को लेकर है, वे स्वयं तो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनके नाम का भी बाकायदा एक फॉर्म भर दिया गया है। समान नाम वाले इन उम्मीदवारों की मौजूदगी ने प्रमुख दावेदारों के चुनावी समीकरणों को खासा उलझा दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे समान नाम वाले उम्मीदवारों की मौजूदगी का असर वोटों के समीकरण पर पड़ सकता है।

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आरिफ हुसैन की मजबूत दावेदारी
शहर जिला अध्यक्ष पद के लिए आरिफ हुसैन का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले उम्मीदवारों में शामिल है। वर्तमान में वे एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष हैं और छात्र राजनीति से निकलकर युवा कांग्रेस की गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस के विभिन्न कार्यक्रमों, आंदोलनों और संगठनात्मक अभियानों में उनकी लगातार मौजूदगी ने उन्हें युवा कार्यकर्ताओं के बीच अलग पहचान दिलाई है। आरिफ हुसैन का कहना है कि युवा कांग्रेस का चुनाव किसी गुट की ताकत दिखाने का नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाने का अवसर है। उनके अनुसार यदि उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना, युवाओं को कांग्रेस की विचारधारा से जोडऩा और नए कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के लिए तैयार करना उनकी प्राथमिकता होगी। हमनाम उम्मीदवारों के सवाल पर उनका कहना है कि युवा मतदाता पूरी तरह जागरूक हैं और सही उम्मीदवार का चयन करने में सक्षम हैं।

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आम कार्यकर्ता की पहचान के साथ मैदान में रितेश
शहर जिला अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में रितेश तिवारी का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शीर्ष पर है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे रितेश ने पुरानी बस्ती में वार्ड स्तर की राजनीति से लेकर युवा कांग्रेस की विभिन्न गतिविधियों में लगातार भागीदारी निभाई है। यही वजह है कि उन्हें जमीनी कार्यकर्ता की छवि वाले युवा नेताओं में गिना जाता है। रितेश तिवारी का कहना है कि युवा कांग्रेस की संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया ने सामान्य कार्यकर्ता को भी नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर दिया है। यदि उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो उनकी पहली प्राथमिकता बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और अधिक से अधिक युवाओं को कांग्रेस की विचारधारा से जोडऩा होगी।

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महिला उम्मीदवार संजना की भी मजबूत मौजूदगी
शहर जिला अध्यक्ष पद के मुकाबले में संजना श्रीवास की दावेदारी भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनी हुई है। वह इस पद के लिए मैदान में उतरने वाली महिला उम्मीदवारों में शामिल हैं। उनकी उम्मीदवारी ने युवा कांग्रेस संगठन में महिलाओं की भागीदारी को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संजना श्रीवास की दावेदारी के पीछे उमेश पटेल के विशेष समर्थक रवि पाण्डेय की सक्रिय भूमिका है। संजना श्रीवास का कहना है कि संगठन को मजबूत बनाने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

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प्रदेश महासचिव: अनमोल और प्राची के बीच मुकाबले की चर्चा
प्रदेश महासचिव पद के लिए रायगढ़ जिले से अनमोल अग्रवाल और प्राची दुबे के नाम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा है। अनमोल अग्रवाल लंबे समय से कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे हैं और उन्हें उमेश पटेल के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। वहीं, रायगढ़ में पिछले करीब पांच वर्षों से निवासरत प्राची दुबे ने भी प्रदेश महासचिव पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। प्राची का स्थायी पता कोरबा है और वे वहां युवा कांग्रेस की जिला उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार प्राची दुबे की दावेदारी को आशीष जायसवाल और आशीष यादव से जोडक़र देखा जा रहा है, जिन्हें देवेंद्र यादव के करीबी नेताओं में माना जाता है। ऐसे में प्रदेश महासचिव पद पर उमेश पटेल और देवेंद्र यादव के प्रभाव क्षेत्रों के बीच की प्रतिस्पर्धा साफ दिखाई दे रही है।

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शहर महासचिव पद पर युवाओं की लंबी फौज
शहर जिला अध्यक्ष के साथ-साथ शहर महासचिव पदों को लेकर भी संगठन के भीतर जबरदस्त हलचल है। इस अहम पद के लिए युवाओं की एक लंबी फौज मैदान में उतर चुकी है। शहर महासचिव पद के लिए मैदान में उतरे उम्मीदवारों में अभिजीत श्रीवास को रवि पाण्डेय ने खड़ा किया है। अजहर सैफी, अनिरुद्ध गिरी, अंजय मिश्रा, अंकेत सत्पथी, आर्यन यादव, बादल सिंह, बंटी शर्मा, भूषण कुमार नायक, दीपक इजारदार, दुर्गेश सारथी, हरकीरत सिंह, जगन्नाथ सिंह राजपूत, जन्मजय सारथी, मानशी शर्मा, मोहम्मद जहीर शेख, नवदीप राज सिंह चंदेल, नवीन साव, राहुल चौहान, राजेश कुमार जांगड़े, साजन कुमार श्रीवास, संदीप श्रीवास, शिव चौहान, सुमित कुमार सिंह और विकास लकड़ा शामिल हैं। संगठन के भीतर चर्चा जोरों पर है कि आशीष जायसवाल से जुड़े माने जाने वाले कुछ युवा नेता भी इस पद के लिए खासे सक्रिय हैं।

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ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद पर चतुष्कोणीय मुकाबला
शहर संगठन के मुकाबले रायगढ़ ग्रामीण युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष पद की लड़ाई अलग और बेहद दिलचस्प मानी जा रही है। इस पद के लिए खरसिया, पुसौर, धरमजयगढ़ और लैलूंगा विधानसभा क्षेत्रों के युवा मतदाता मतदान करेंगे। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद पर योगेश चौहान का नाम मजबूत दावेदारों में लिया जा रहा है। योगेश चौहान उमेश पटेल के खास सिपहसालार माने जाते हैं। वे पहले भी युवा कांग्रेस ग्रामीण संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की सांगठनिक समझ रखने वाला युवा नेता माना जाता है। उनके पक्ष में सबसे बड़ा आधार ग्रामीण क्षेत्रों में पुराना संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क को बताया जा रहा है।

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राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि उमेश पटेल से जुड़े कई स्थानीय नेताओं का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर पुसौर क्षेत्र से आने वाले आशीष मिश्रा की दावेदारी ने मुकाबले को नई दिशा दी है। आशीष, पूर्व जिला पंचायत सदस्य आकाश मिश्रा के छोटे भाई हैं, जिन्हें अब देवेंद्र यादव खेमे से जोडक़र देखा जाता है। इसके अलावा कोतमरा निवासी दुर्गा मालाकार और पूर्व ग्रामीण एनएसयूआई जिला अध्यक्ष सत्पुरुष महर्षि भी अपनी दावेदारी के साथ मैदान में हैं। इनकी मौजूदगी ने ग्रामीण अध्यक्ष पद के मुकाबले को पूरी तरह से चतुष्कोणीय बना दिया है।

खरसिया पर सबसे ज्यादा निगाहें, एक नाम चर्चा में
रायगढ़ ग्रामीण युवा कांग्रेस चुनाव में इस समय सबसे ज्यादा नजर खरसिया विधानसभा अध्यक्ष पद के मुकाबले पर टिकी हुई है। प्रदेश के कद्दावर नेता व वर्तमान विधायक उमेश पटेल के मजबूत संगठनात्मक क्षेत्र माने जाने वाले खरसिया में इस बार विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें राकेश पटेल, अजय पटेल, बृजेश राठौर, दीपेश गबेल, गिरीश राठिया, हितेश्वर पटेल, खिलेश चौधरी, कुश पटेल, ओमप्रकाश साव, प्रवीण पाण्डेय, रूपेंद्र डनसेना, सतीश पटेल, शेख ताज और शिवराज चौहान शामिल हैं। इन सभी दावेदारों के बीच बुनगा निवासी प्रवीण पाण्डेय के नामांकन को लेकर राजनीतिक गलियारों में विशेष चर्चा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि प्रवीण पाण्डेय को पूर्व जिला पंचायत सदस्य आकाश मिश्रा का समर्थन प्राप्त है। स्थानीय राजनीति में आकाश मिश्रा को वर्तमान में देवेंद्र यादव समर्थक समूह से जोडक़र देखा जा रहा है। यही वजह है कि उमेश पटेल के प्रभाव वाले खरसिया क्षेत्र में दूसरे राजनीतिक समीकरण से जुड़े माने जा रहे उम्मीदवार की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि अंतिम फैसला डिजिटल सदस्यता अभियान और मतदान प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा, लेकिन नामांकन के बाद से ही खरसिया विधानसभा अध्यक्ष पद का चुनाव जिले के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल हो गया है।

ग्रामीण महासचिव पद पर भी कई युवा चेहरों की परीक्षा
ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद की तरह ग्रामीण महासचिव पद को लेकर भी युवाओं में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है। नामांकन करने वालों में आकृत सारथी, भूपेंद्र गबेल, बिंदु साव, हरिओम शर्मा, हितेश पटेल, ईश्वर लाल साहू, रामप्रसाद सारथी, संजय उरांव, संजय दोंदे, शैलेश शर्मा, शिवशंकर पैकरा, वेदप्रकाश गुप्ता और विकास गबेल सहित कई युवा नेताओं के नाम शामिल हैं। जिला नेतृत्व और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की इस अहम कड़ी के लिए सभी संभावित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। आशीष जायसवाल और आकाश मिश्रा ने यहां भी कई कंडीडेट खड़े किए हुए हैं जिसके कारण महासचिव चुनाव भी दिलचस्प बन गया है।

धरमजयगढ़ और लैलूंगा में भी मुकाबला रोचक
धरमजयगढ़ और लैलूंगा विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी कई युवा मैदान में हैं। धरमजयगढ़ से दया शंकर बेहरा, पुष्पेंद्र सिदार, रीता श्रीवास, साहिल जांगड़े, सुमित सरकार और वेदांत दीवान चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं लैलूंगा से अलोका स्वर्णकार, अफरांश सिन्हा, धर्मव्रत बरुआ, जितेंद्र साव, जुनेद अहमद, कुंजबिहारी यादव, प्रदीप पटेल, सौरज साव और वसीम अहमद ने दावेदारी पेश की है।

ब्लॉक अध्यक्ष पद पर होगी संगठन की असली परीक्षा
युवा कांग्रेस के चुनाव में जिला और प्रदेश स्तर के पद जितने महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही अहम भूमिका ब्लॉक अध्यक्षों की भी मानी जाती है। रायगढ़ शहर, चक्रधर नगर, पुसौर, घरघोड़ा, खरसिया, धरमजयगढ़ और लैलूंगा सहित विभिन्न ब्लॉकों में भी बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं ने नामांकन दाखिल किया है। संगठन से जुड़े लोग मानते हैं कि ब्लॉक अध्यक्ष का चुनाव केवल एक पद का चुनाव नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी है।

संगठन की मर्यादा और सदस्यता अभियान में छिपी है जीत की चाबी
इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कोई भी वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंच से किसी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकता। शहर कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव और ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष नगेंद्र नेगी सहित कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी खुलकर सामने नहीं आया है। ऐसे में नामांकन के साथ चुनावी माहौल जरूर बन गया है, लेकिन असली मुकाबला स्क्रूटनी के बाद शुरू होने वाले डिजिटल सदस्यता अभियान में होगा।

बहरहाल इस चुनाव में केवल राजनीतिक पहचान या किसी बड़े नेता से निकटता काम नहीं आएगी। उम्मीदवारों को स्वयं युवाओं तक पहुंचना होगा। जो प्रत्याशी सबसे मजबूत टीम तैयार करेगा, बूथ स्तर तक नेटवर्क बनाएगा और सदस्यता अभियान में बेहतर प्रदर्शन करेगा, जीत का ताज उसी के सिर सजेगा।

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