दो-तीन महीने में ही उखड़ने लगी नई सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल…

दो-तीन महीने में ही उखड़ने लगी नई सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल…

इन्हे भी जरूर देखे

धरमजयगढ़/ जिस सड़क के बनने से खर्रा पंचायत के ग्रामीणों को लंबे समय तक बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, वह निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का दावा है कि महज दो-तीन महीने में सड़क के कई हिस्सों में डामर उखड़ने, गिट्टियां बाहर आने और धंसाव जैसी स्थिति बनने लगी। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच की मांग की है। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि सड़क को भारी वाहनों की आवाजाही से नुकसान पहुंचा है और क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठेकेदार के माध्यम से कंक्रीट कराकर दुरुस्त कराया जाएगा।

खर्रा पंचायत क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों के लिए यह सड़क लंबे समय से खराब आवागमन की समस्या के बीच एक महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखी जा रही थी। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क की सतह पर दिखाई देने लगी खराबी ने अब इसकी टिकाऊपन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों के मुताबिक कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। कुछ हिस्सों में धंसाव भी नजर आ रहा है। उनका कहना है कि यदि सड़क निर्माण के बाद इतनी जल्दी मरम्मत की जरूरत पड़ रही है तो इसकी वजह की जांच होनी चाहिए। बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थिति और बिगड़ने की आशंका भी ग्रामीण जता रहे हैं।

गुणवत्ता पर सवाल, विभाग की वजह अलग

सड़क की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों का संदेह सीधे निर्माण की गुणवत्ता पर है। बताया गया है कि पीएमजीएसवाई के तहत सड़क निर्माण का काम ठेकेदार सुनील रामदास को मिला था। ग्रामीण अब निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सड़क की संरचना और काम के दौरान अपनाए गए तकनीकी मानकों की जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि सड़क खराब होने के कारण को लेकर विभाग का पक्ष अलग है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण उसे नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत ठेकेदार के माध्यम से कराने की बात कही है।

यही अंतर अब पूरे मामले का अहम सवाल बन गया है। यदि सड़क भारी वाहनों के दबाव से खराब हुई है तो यह तकनीकी जांच से स्पष्ट किया जा सकता है। दूसरी ओर, यदि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री या सड़क की मूल संरचना में कमी सामने आती है तो गुणवत्ता और निगरानी से जुड़े सवाल भी गंभीर होंगे।

मरम्मत से पहले वजह की जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि केवल खराब हिस्सों पर कंक्रीट डालकर मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं होगा। उनका सवाल है कि सड़क बनने के दो-तीन महीने के भीतर ही यदि कई हिस्से खराब हो गए तो पहले यह पता लगाया जाए कि सड़क की वास्तविक कमजोरी कहां है। निर्माण की मोटाई, बेस और सब-बेस, इस्तेमाल की गई सामग्री तथा गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की जांच से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। साथ ही निर्माण पूरा होने के बाद विभागीय निरीक्षण और सड़क की गुणवत्ता से संबंधित परीक्षण हुए थे या नहीं, यह भी सामने आना जरूरी है।

फिलहाल ग्रामीणों के आरोप और विभाग की ओर से बताई गई वजह, दोनों के बीच अंतर है। ऐसे में किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय सड़क की तकनीकी जांच ही वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है। जांच से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि नुकसान का कारण निर्माण संबंधी कमी है या भारी वाहनों का दबाव।

खर्रा के ग्रामीणों की मांग फिलहाल इतनी है कि सड़क की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो तथा उन्हें ऐसी सड़क मिले जो लंबे समय तक आवागमन का भरोसा दे सके। विभाग द्वारा मरम्मत का आश्वासन दिया गया है, लेकिन सड़क खराब होने की मूल वजह सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि समस्या का स्थायी समाधान क्या होगा।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इन्हे भी जरूर देखे

Must Read



LIVE SHARE MARKET